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Kumbh Ka Mela Kyo Lagta Hai Aur Kahan Kahan Lagta Hai -In Hindi 2019

Kumbh Ka Mela Kyo Lagta Hai Aur Kahan Kahan Lagta Hai

दोस्तों आज का हमारा जो विषय है बो है कुम्भ का मेला दोस्तों जैसा की आप सभी को पता है की इस समय कुम्भ के मेला का बहुत ज्यादा जोर शोर है तो दोस्तों आज मै  आपको किम्भ के मेला के बारे में पूरी जानकारी दूंगा की की कुम्भ का मेला क्यों लगता है ,और कुम्भ का मेला कहाँ कहाँ लगता है आखिर कुम्भ का मेला कब से लगना सुरु हुआ

Kumbh Ka Mela

दोस्तों मै आपको बता दू की कुम्भ का मेला सनातन धर्म के अनुसार मनाया जाने बाला सबसे बड़ा मेला है दोस्तों कुम्भ के मेला की गिनती दुनिया के सबसे बड़े मेले के रूप में होती है

दोस्तों कुम्भ के मेले को लेकर बहुत सी पौरादिक कथाये सुनी जाती है दोस्तों सनातन धर्म के लोग लोग इस मेले में आकर स्नान करने के बाद अपने लिए मनोकामना करते है

हिन्दू बेद पुराण की माने तो इस मेले की शुरुआत समुन्दर मंथन से सुरु होना माना  जाता है दोस्तों माना जाता है की अमृत कुम्भ से अमृत की कुछ बूंदे गिरने को लेकर है ,

कहा जाता है की जब समुद्र मंथन हुआ था तो उसमे अमृत का कुम्भ या कलस निकला था अमृत कुम्भ के निकलते ही जयंत अमृत कलस को लेकर आसमान में उड़ गए जिस कारण देव और दानबो काफी लड़ाई हुई जिससे अमृत की कुछ बूंदे आसमान से छलककर ( इलाहाबाद ,नासिक ,हरिद्वार ,उज्जैन ) पर कुछ बूंदे गिरी थी इस मेले का इतिहास काफी  पुराना माना जाता है

इस मेले हिन्दू समुदाय के साधु संत आकर स्नान करते है और अपनी मनोकामना की पूर्ती के लिए हवन करते है फ्रेंड्स ये मेला हिन्दुस्तान में चार जगह लगता है 

  • नासिक 
  • हरिद्वार 
  • प्रयागराज 
  • उज्जैन 

Nashik Ka Kumbh

  • Nashik Ka Kumbh   दोस्तों 12 सालो में जो मेला लगता है बो एकबार नासिक में भी लगता है ये मेला नासिक में ज्योतिर्लिंग टिरयंकेशर नाम के एक सहर में लगता है दोस्तों ये शहर नासिक से ३८ किलोमीटर की दूरी पर है दोस्तों गोदावरी नदी भी यही से निकलती है इस मेले के आयोजन गोदावरी नदी के किनारे पर ही होता है दोस्तों हिन्दू बेद पुराण की माने तो अमृत की कुछ बूंदे इस जगह पर भी गिरी थी जिस कारण यह मेला लगता है दोस्तों बैसे तो इस मेले में लाखो की संख्या में लोग आते है मगर सबसे ज्यादा इस मेले में साधु संत आते है और गोदावरी के पावन जल में स्नान करके अपनी आत्मा के लिए मोक्ष की कामना  करते है फ्रेंड्स एक बात मई आपको और बता दू की यहाँ पर सिवरात्रि का त्यौहार भी काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है 
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Haridwar Ka Kumbh

  • Haridwar Ka Kumbh: दोस्तों बैसे तो कुम्भ और भी स्थानों पर मनाया जाता है मगर कुम्भ के मेले का असली मजा तो हरिद्वार के मेले का है ,फ्रेंड्स जैसा की आप नाम से ही समझ गए होंगे हरिद्वार यानी की हरी का द्वार दोस्तों हरिद्वार का जिक्र हिन्दू वेद पुराण में भी काफी बिस्तर के साथ मिलता है दोस्तों हरिद्वार के कुम्भ के मेले की मानयता हिन्दू समाज में कुछ ज्यादा ही है क्यूंकि प्राचीन ग्रंथो में हरिद्वार को को और नहीं कई नामो से जाना जाता है जैसे तपोबन ,मायापुरी ,गंगाद्वार और मोक्ष द्वार फ्रेंड्स ये हिन्दू समाज के लिए सबसे बड़ा स्थान भी है इस मेले में भी लाखो की संख्या में लोग आकर गंगा में स्नान करते है और अपनी आत्मा की सन्ति और मोक्ष की कामना करते है 

Pryagraj Ka Kumbh

  • Pryagraj Ka Kumbh : प्रयागराज का कुम्भ या दोस्तों इलाहाबाद का कुम्भ फ्रेंड्स पहले इस जगह को इलाहाबाद के नाम से जाना जाता था मगर अब इस स्थान को प्रयागराज के नाम से जानते है दोस्तों इलाहाबाद को संगम नगरी भी कहते है इसलिए यहाँ पर लगने बाला कुम्भ का मेला भी  काफी ख़ास माना जाता है दोस्तों यहाँ पर गंगा जमुना और सरस्वती तीनो नदियों की धराये एक साथ मिलकर एक खूबसूरत  संगम बनाती है दोस्तों इसी कारण इसे संगम नगरी कहते है १२ सालो के बाद एक बार कुम्भ के मेला का आयोजन इलाहाबाद में भी किया जाता है फ्रेंड्स इस  मेले में लोखो की संख्या में लोग पहुंचकर संगम में स्नान करते है और अपनी आत्मा के लिए मोक्ष की कामना करते है 
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Ujjain Ka Mela

  • Ujjain Ka Kumbh : उज्जैन का मतलब है विजय नगरी ,  दोस्तों अब मै आपको बता दू की 12 सालो   में ये मेला एक बार उज्जैन में भी मनाया जाता है दोस्तों हिन्दू वेद पुराणों के अनुसार माना जाता हैकी अमृत कलस की कुछ बूंदे  उज्जैन में भी गिरी थी इसलिए इस जगह भी कुम्भ के मेले का आयोजन किया जाता है ये सहर मध्य प्रदेश के पश्चिमी सीमा पर स्तिथ है ये सहर सिर्पा नदी के किनारे पर स्तिथ है दोस्तों उज्जैन भारत के धार्मिक स्थानों में से एक मन जाता है हिन्दू वेद पुराणों की माने तो उज्जैन 7 मोक्ष पूरी स्थानों में से एक है लोग इस मेले में आकर सिर्पा नदी में स्नान करने के बाद आत्मा की मोक्ष की प्रार्थना करते है 

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Khustar Noorani

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